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Moral Story

एक चोर अक्सर एक साधु के पास आता और उससे ईश्वर से साक्षात्कार का उपाय पूछा करता था। लेकिन साधु टाल देता था। वह बार-बार यही कहता कि वह इसके बारे में फिर कभी बताएगा। लेकिन चोर पर इसका असर नहीं पड़ता था। वह रोज पहुंच जाता। एक दिन चोर का आग्रह बहुत बढ़ गया। वह जमकर बैठ गया। उसने कहा कि वह बगैर उपाय जाने वहां से जाएगा ही नहीं। साधु ने चोर को दूसरे दिन सुबह आने को कहा। चोर ठीक समय पर आ गया। साधु ने कहा, 'तुम्हें सिर पर कुछ पत्थर रखकर पहाड़ पर चढ़ना होगा। वहां पहुंचने पर ही ईश्वर के दर्शन की व्यवस्था की जाएगी।' चोर के सिर पर पांच पत्थर लाद दिए गए और साधु ने उसे अपने पीछे-पीछे चले आने को कहा। इतना भार लेकर वह कुछ दूर ही चला तो उस बोझ से उसकी गर्दन दुखने लगी। उसने अपना कष्ट कहा तो साधु ने एक पत्थर फिंकवा दिया। थोड़ी देर चलने पर शेष भार भी कठिन प्रतीत हुआ तो चोर की प्रार्थना पर साधु ने दूसरा पत्थर भी फिंकवा दिया। यही क्रम आगे भी चला। ज्यों-ज्यों चढ़ाई बढ़ी, थोडे़ पत्थरों को ले चलना भी मुश्किल हो रहा था। चोर बार-बार अपनी थकान व्यक्त कर रहा था। अंत में सब ...

असफलता सफलता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है

सभी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब सभी चीज़ें आपके विरोध में हो रहीं हों | चाहें आप एक प्रोग्रामर हैं या कुछ और, आप जीवन के उस मोड़ पर खड़े होता हैं जहाँ सब कुछ ग़लत हो रहा होता है| अब चाहे ये कोई सॉफ्टवेर हो सकता है जिसे सभी ने रिजेक्ट कर दिया हो, या आपका कोई फ़ैसला हो सकता है जो बहुत ही भयानक साबित हुआ हो | लेकिन सही मायने में, विफलता सफलता से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है | हमारे इतिहास में जितने भी बिजनिसमेन, साइंटिस्ट और महापुरुष हुए हैं वो जीवन में सफल बनने से पहले लगातार कई बार फेल हुए हैं | जब हम बहुत सारे कम कर रहे हों तो ये ज़रूरी नहीं कि सब कुछ सही ही होगा| लेकिन अगर आप इस वजह से प्रयास करना छोड़ देंगे तो कभी सफल नहीं हो सकते | हेनरी फ़ोर्ड, जो बिलियनेर और विश्वप्रसिद्ध फ़ोर्ड मोटर कंपनी के मलिक हैं | सफल बनने से पहले फ़ोर्ड पाँच अन्य बिज़निस मे फेल हुए थे | कोई और होता तो पाँच बार अलग अलग बिज़निस में फेल होने और कर्ज़ मे डूबने के कारण टूट जाता| लेकिन फ़ोर्ड ने ऐसा नहीं किया और आज एक बिलिनेअर कंपनी के मलिक हैं | अगर विफलता की बात करें तो थॉमस अल्वा एड...

Apne desh ko jano

हर देश की पहचान कुछ विशेष चिह्नों से होती है. देश का नक्शा या मानचित्र हमें देश की भौगोलिक स्थिति की सूचना देता है. राष्ट्रध्वज सभी महत्त्वपूर्ण सरकारी संस्थानों, राष्ट्रीय पर्वो और अन्तराष्ट्रीय घटनाओं पर देश की निशानी के रूप में प्रयोग किया जाता है. राष्ट्रचिह्न का उपयोग मुद्रा और सरकारी मुहरों पर होता है. राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत सभी राष्ट्रीय पर्वो पर, अन्तर्राष्ट्रीय अवसरों पर, पुलिस, सेना व सेना से संबंधित अन्य विभागों के विशेष अवसरों पर, तथा स्कूलों में गाया जाता है. राष्ट्रीय पशु, पक्षी, वृक्ष, फूल और फल हमें अपने देश की विशेषताओं से परिचित कराते हैं. हमारा राष्ट्रीय ध्वज खादी की अलग अलग रंगों वाली तीन पट्टियों से बना है. सबसे उपर केसरी रंग, बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग है. केसरी रंग राष्ट्र की शक्ति का प्रतीक है. यह हमें साहस त्याग और बलिदान की याद दिलाता है. बीच में सफेद रंग धर्मचक्र के साथ शांति, सत्य और पवित्रता का सूचक है. हरा रंग दृढ विश्वास और अपने देश की उपजाऊ मिट्टी की याद दिलाता है. सफेद रंग के मध्य में गहरे नीले रंग का धर्मचक्र्र न्याय ...

True motivational stories/poems/songs/ videos-सच्ची प्रेरणादायक कहानियां/कवि

एक कौआ जंगल में रहता था और अपने जीवनसे संतुष्ट था। एक दिन उसने एक हंस को देखा, "यह हंस कितना सफ़ेद है, कितना सुन्दर लगता है।" , उसने मन ही मन सोचा। उसे लगा कि यह सुन्दर हंस दुनिया में सबसे सुखी पक्षी होगा, जबकि मैं तो कितना काला हूँ ! यह सब सोचकर वह काफी परेशान हो गया और उससे रहा नहीं गया, उसने अपने मनोभाव हंस को बताये । हंस ने कहा – "वास्तिकता ऐसी है कि पहले मैं खुदको आसपास के सभी पक्षिओ में सुखी समझता था। लेकिन जब मैने तोते को देखा तो पाया कि उसके दो रंग है तथा वह बहुत ही मीठा बोलता है। तब से मुझे लगा कि सभी पक्षिओ में तोता ही सुन्दर तथा सुखी है।" अब कौआ तोते के पास गया। तोते ने कहा – "मै सुखी जिंदगी जी रहा था, लेकिन जब मैंने मोर को देखा तब मुझे लगा कि मुझमे तो दो रंग ही , परन्तु मोर तो विविधरंगी है। मुझे तो वह ही सुखी लगता है।" फिर कौआ उड़कर प्राणी संग्रहालय गया। जहाँ कई लोग मोर देखने एकत्र हुए थे। जब सब लोग चले गए तो कौआ उसके पास जाकर बोला –"मित्र , तुम तो अति सुन्दर हो। कितने सारे लोग तुम्हे देखने के लिए इकट्ठे ह...

Chanakya ---- 15 Gnome sentence चाणक्य के 15 सूक्ति वाक्य

चाणक्य के 15 सूक्ति वाक्य ---- 1) "दूसरो की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी." 2)"किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार (सीधा साधा ) नहीं होना चाहिए ---सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं." 3)"अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे डंस भले ही न दो पर डंस दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए. " 4)"हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है --यह कडुआ सच है." 5)"कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो ---मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ? इसका क्या परिणाम होगा ? क्या मैं सफल रहूँगा ?" 6)"भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये इस पर हमला करदो यानी भय से भागो मत इसका सामना करो ." 7)"दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है." "काम का निष्पादन करो , परिणाम से मत डरो." 9)"सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है." 10)...

instructive stories

बहुत समय पहले की बात है एक भिश्ती था। उसके पास दो घडे थे। उन घडों को उसने एक लम्बे डंडे के दो किनारों से बांधा हुआ था। एक घडा था साबुत और सुन्दर परन्तु दूसरे घडे में दरार थी। भिश्ती हर सुबह नदी तट पर जा कर दोनों घडों में पानी भरता और फिर शुरू होता उसका लम्बा सफर ऊंची पहाडी चढ क़र मालिक के घर तक । जब तक वह वहां पहुंचता टूटे हुए घडे में से आधा पानी रास्ते में ही बह चुका होता जबकि साबुत घडे में पूरा पानी होता।बहुत समय तक ऐसे ही चलता रहा । मालिक के घर तक डेढ घडा पानी ही पहुंचता था। साबुत घडे क़ो अपने पर बहुत घमंड था। उसकी बनावट बहुत सुन्दर थी और वह काम में भी पूरा आता था। टूटे हुए घडे क़ो अपनी बेबसी पर आंसू आते। वह उदास और दुखी रहता क्योंकि वह अधूरा था। उसे अपनी कमी का एहसास था। वह जानता था कि जितना काम उसे करना चाहिये वह उससे आधा ही कर पाता है। एक दिन टूटा हुआ घडा अपनी नाकामयाबी को और सहन नहीं कर पाया और वह भिश्ती से बोला ''मुझे अपने पर शर्म आती है मै अधूरा हूं। मैं आपसे क्षमा मांगना चाहता हूं।'' भिश्ती ने उससे पूछा''तुम्हें किस बात की...

नानी की शिक्षाप्रद कहानियाँ Nanny's instructive stories

एक महात्मा विचरण करते हुए एक गृहस्थ के पास पहुंचे । गृहस्थ ने उनका पर्याप्त आदर- सत्कार किया । बातों-बातों में उन्होंने गृहस्थ को बताया कि वे पशु- पक्षियों की बोली समझते हैं । उसके पास से अपने आश्रम लौटते समय उन्होंने व्यक्ति को आशीर्वचनों से उपकृत करना चाहा । वे बोले, "कहो, क्या आशीर्वाद दूं मैं तुम्हें ? तुम किस दिशा में आगे बढ़ना और सफल होना चाहोगे ?" महात्मा ने गृहस्थ को उसकी इच्छाओं के अनुरूप आशीर्वाद दिया । उनके विदा होते समय गृहस्थ ने एक और मांग उनके सामने रख दी । उसने कहा, "महाराज, आपने कहा है कि आप पशु- पक्षियों की बातें समझ सकते हैं । आप यदि मुझ पर प्रसन्न हों तो कृपया वह विद्या मुझे भी सिखाते जाइये ।" महात्मा ने उसे समझाते हुए कहा, "देखो भाई, यह विद्या तुम्हारे काम की नहीं है । इसके प्रयोग से तुम्हें मानसिक कष्ट ही भोगना पड़ सकता है । न जाने कब कौन-सी बातें तुम्हारे कान में पड़ें और तुम चिंताग्रस्त हो जाओ । इस विद्या की इच्छा मत करो । अन्य जीवों की बातें सुनने से क्या लाभ ?" लेकिन महात्मा की बातें वह गृहस्थ नहीं माना । अ...