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Showing posts from September, 2014

Moral Story

एक चोर अक्सर एक साधु के पास आता और
उससे ईश्वर से साक्षात्कार का उपाय
पूछा करता था। लेकिन साधु टाल देता था।
वह
बार-बार यही कहता कि वह इसके बारे में
फिर
कभी बताएगा। लेकिन चोर पर इसका असर
नहीं पड़ता था। वह रोज पहुंच जाता। एक
दिन
चोर का आग्रह बहुत बढ़ गया। वह जमकर बैठ
गया। उसने कहा कि वह बगैर उपाय जाने
वहां से
जाएगा ही नहीं। साधु ने चोर को दूसरे दिन
सुबह
आने को कहा। चोर ठीक समय पर आ गया।
साधु ने कहा, 'तुम्हें सिर पर कुछ पत्थर रखकर
पहाड़ पर चढ़ना होगा। वहां पहुंचने पर
ही ईश्वर
के दर्शन की व्यवस्था की जाएगी।' चोर के
सिर
पर पांच पत्थर लाद दिए गए और साधु ने उसे
अपने पीछे-पीछे चले आने को कहा। इतना भार
लेकर वह कुछ दूर ही चला तो उस बोझ से
उसकी गर्दन दुखने लगी। उसने अपना कष्ट
कहा तो साधु ने एक पत्थर फिंकवा दिया।
थोड़ी देर चलने पर शेष भार भी कठिन
प्रतीत
हुआ तो चोर की प्रार्थना पर साधु ने
दूसरा पत्थर भी फिंकवा दिया। यही क्रम
आगे
भी चला। ज्यों-ज्यों चढ़ाई बढ़ी, थोडे़
पत्थरों को ले चलना भी मुश्किल
हो रहा था। चोर
बार-बार अपनी थकान व्यक्त कर रहा था।
अंत
में सब पत्थर फेंक दिए गए और चोर
सुगमतापूर…

असफलता सफलता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है

सभी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब
सभी चीज़ें आपके विरोध में हो रहीं हों | चाहें
आप एक प्रोग्रामर हैं या कुछ और, आप जीवन के
उस मोड़ पर खड़े होता हैं जहाँ सब कुछ ग़लत
हो रहा होता है| अब चाहे ये कोई सॉफ्टवेर
हो सकता है जिसे सभी ने रिजेक्ट कर दिया हो,
या आपका कोई फ़ैसला हो सकता है जो बहुत
ही भयानक साबित हुआ हो |
लेकिन सही मायने में, विफलता सफलता से
ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है | हमारे इतिहास
में जितने भी बिजनिसमेन, साइंटिस्ट और
महापुरुष हुए हैं वो जीवन में सफल बनने से पहले
लगातार कई बार फेल हुए हैं | जब हम बहुत सारे
कम कर रहे हों तो ये ज़रूरी नहीं कि सब कुछ
सही ही होगा| लेकिन अगर आप इस वजह से
प्रयास करना छोड़ देंगे तो कभी सफल
नहीं हो सकते |
हेनरी फ़ोर्ड, जो बिलियनेर और विश्वप्रसिद्ध
फ़ोर्ड मोटर कंपनी के मलिक हैं | सफल बनने से
पहले फ़ोर्ड पाँच अन्य बिज़निस मे फेल हुए थे |
कोई और होता तो पाँच बार अलग अलग
बिज़निस में फेल होने और कर्ज़ मे डूबने के कारण
टूट जाता| लेकिन फ़ोर्ड ने ऐसा नहीं किया और
आज एक बिलिनेअर कंपनी के मलिक हैं |
अगर विफलता की बात करें तो थॉमस
अल्वा एडिसन का नाम सबसे पहले आता…

Apne desh ko jano

हर देश की पहचान कुछ विशेष चिह्नों से
होती है. देश का नक्शा या मानचित्र हमें देश
की भौगोलिक स्थिति की सूचना देता है.
राष्ट्रध्वज सभी महत्त्वपूर्ण
सरकारी संस्थानों, राष्ट्रीय पर्वो और
अन्तराष्ट्रीय घटनाओं पर देश की निशानी के
रूप में प्रयोग किया जाता है. राष्ट्रचिह्न
का उपयोग मुद्रा और सरकारी मुहरों पर
होता है. राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत
सभी राष्ट्रीय पर्वो पर, अन्तर्राष्ट्रीय
अवसरों पर, पुलिस, सेना व सेना से संबंधित अन्य
विभागों के विशेष अवसरों पर, तथा स्कूलों में
गाया जाता है. राष्ट्रीय पशु, पक्षी, वृक्ष,
फूल और फल हमें अपने देश की विशेषताओं से
परिचित कराते हैं.
हमारा राष्ट्रीय ध्वज खादी की अलग अलग
रंगों वाली तीन पट्टियों से बना है. सबसे उपर
केसरी रंग, बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग
है. केसरी रंग राष्ट्र की शक्ति का प्रतीक है.
यह हमें साहस त्याग और बलिदान की याद
दिलाता है. बीच में सफेद रंग धर्मचक्र
के साथ शांति, सत्य और
पवित्रता का सूचक है.
हरा रंग दृढ विश्वास और
अपने देश की उपजाऊ मिट्टी की याद
दिलाता है. सफेद रंग के मध्य में गहरे नीले रंग
का धर्मचक्र्र न्याय और गति का प्रतीक है.
धर्म…

True motivational stories/poems/songs/ videos-सच्ची प्रेरणादायक कहानियां/कवि

एक कौआ जंगल में रहता था और अपने जीवनसे
संतुष्ट
था। एक दिन उसने एक हंस को देखा, "यह हंस
कितना सफ़ेद है, कितना सुन्दर लगता है।" ,
उसने मन
ही मन सोचा।
उसे लगा कि यह सुन्दर हंस दुनिया में सबसे
सुखी पक्षी होगा, जबकि मैं
तो कितना काला हूँ ! यह सब
सोचकर वह काफी परेशान हो गया और उससे
रहा नहीं गया,
उसने अपने मनोभाव हंस को बताये ।
हंस ने कहा – "वास्तिकता ऐसी है कि पहले
मैं
खुदको आसपास के सभी पक्षिओ में
सुखी समझता था।
लेकिन जब मैने तोते
को देखा तो पाया कि उसके दो रंग है
तथा वह बहुत ही मीठा बोलता है। तब से
मुझे
लगा कि सभी पक्षिओ में तोता ही सुन्दर
तथा सुखी है।"
अब कौआ तोते के पास गया।
तोते ने कहा – "मै
सुखी जिंदगी जी रहा था, लेकिन जब
मैंने मोर को देखा तब मुझे लगा कि मुझमे
तो दो रंग ही ,
परन्तु मोर तो विविधरंगी है। मुझे तो वह
ही सुखी लगता है।"
फिर कौआ उड़कर प्राणी संग्रहालय गया।
जहाँ कई लोग
मोर देखने एकत्र हुए थे।
जब सब लोग चले गए तो कौआ उसके पास
जाकर
बोला –"मित्र , तुम तो अति सुन्दर हो।
कितने सारे लोग
तुम्हे देखने के लिए इकट्ठे होते है ! प्रतिदिन
तुम्हे देखने
के ल…

Chanakya ---- 15 Gnome sentence चाणक्य के 15 सूक्ति वाक्य

चाणक्य के 15 सूक्ति वाक्य ----
1) "दूसरो की गलतियों से सीखो अपने
ही ऊपर प्रयोग
करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी."
2)"किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार
(सीधा साधा )
नहीं होना चाहिए ---सीधे वृक्ष और
व्यक्ति पहले काटे
जाते हैं."
3)"अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब
भी उसे
जहरीला दिखना चाहिए वैसे डंस भले ही न
दो पर डंस दे
सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास
करवाते
रहना चाहिए. "
4)"हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर
होता है --यह
कडुआ सच है."
5)"कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन
सवाल अपने आपसे
पूछो ---मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ?
इसका क्या परिणाम
होगा ? क्या मैं सफल रहूँगा ?"
6)"भय को नजदीक न आने दो अगर यह
नजदीक आये इस
पर हमला करदो यानी भय से भागो मत
इसका सामना करो ."
7)"दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष
का विवेक और
महिला की सुन्दरता है." "काम
का निष्पादन करो , परिणाम से मत डरो."
9)"सुगंध का प्रसार हवा के रुख
का मोहताज़ होता है पर
अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है."
10)"ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में
ब…

instructive stories

बहुत समय पहले की बात है एक भिश्ती था।
उसके पास दो घडे थे। उन घडों को उसने एक
लम्बे डंडे के दो किनारों से बांधा हुआ था।
एक घडा था साबुत और सुन्दर परन्तु दूसरे घडे
में दरार थी।
भिश्ती हर सुबह नदी तट पर जा कर
दोनों घडों में पानी भरता और फिर शुरू
होता उसका लम्बा सफर ऊंची पहाडी चढ
क़र मालिक के घर तक । जब तक वह
वहां पहुंचता टूटे हुए घडे में से
आधा पानी रास्ते में ही बह
चुका होता जबकि साबुत घडे में
पूरा पानी होता।बहुत समय तक ऐसे
ही चलता रहा । मालिक के घर तक डेढ
घडा पानी ही पहुंचता था। साबुत घडे
क़ो अपने पर बहुत घमंड था। उसकी बनावट
बहुत सुन्दर थी और वह काम में
भी पूरा आता था। टूटे हुए घडे
क़ो अपनी बेबसी पर आंसू आते। वह उदास और
दुखी रहता क्योंकि वह अधूरा था। उसे
अपनी कमी का एहसास था। वह
जानता था कि जितना काम उसे
करना चाहिये वह उससे आधा ही कर
पाता है।
एक दिन टूटा हुआ
घडा अपनी नाकामयाबी को और सहन
नहीं कर पाया और वह भिश्ती से
बोला ''मुझे अपने पर शर्म आती है मै
अधूरा हूं। मैं आपसे क्षमा मांगना चाहता हूं।''
भिश्ती ने उससे पूछा''तुम्हें किस बात
की शर्म है।'' ''…

नानी की शिक्षाप्रद कहानियाँ Nanny's instructive stories

एक महात्मा विचरण करते हुए एक गृहस्थ के
पास पहुंचे । गृहस्थ ने उनका पर्याप्त आदर-
सत्कार किया । बातों-बातों में उन्होंने
गृहस्थ को बताया कि वे पशु-
पक्षियों की बोली समझते हैं । उसके पास से
अपने आश्रम लौटते समय उन्होंने
व्यक्ति को आशीर्वचनों से उपकृत
करना चाहा ।
वे बोले, "कहो, क्या आशीर्वाद दूं मैं तुम्हें ?
तुम किस दिशा में आगे बढ़ना और सफल
होना चाहोगे ?"
महात्मा ने गृहस्थ को उसकी इच्छाओं के
अनुरूप आशीर्वाद दिया । उनके विदा होते
समय गृहस्थ ने एक और मांग उनके सामने रख
दी । उसने कहा, "महाराज, आपने कहा है
कि आप पशु- पक्षियों की बातें समझ सकते हैं ।
आप यदि मुझ
पर प्रसन्न हों तो कृपया वह विद्या मुझे
भी सिखाते जाइये ।"
महात्मा ने उसे समझाते हुए कहा,
"देखो भाई, यह विद्या तुम्हारे काम
की नहीं है । इसके प्रयोग से तुम्हें मानसिक
कष्ट ही भोगना पड़ सकता है । न जाने कब
कौन-सी बातें तुम्हारे कान में पड़ें और तुम
चिंताग्रस्त हो जाओ । इस
विद्या की इच्छा मत करो । अन्य
जीवों की बातें सुनने से क्या लाभ ?"
लेकिन महात्मा की बातें वह गृहस्थ
नहीं माना । अंत में उसने इच्छित
विद्या प…

Mehnat ki kmai

खुशहालपुर में नारायण नाम का एक अमीर
साहूकार रहता था। उसका एक बेटा और एक
बेटी थी। लडक़ी की शादी हुए तीन साल
हो गये थे और वह अपने ससुराल में खुश थी।
लडक़ा राजू वैसे तो बुद्धू नहीं था लेकिन गलत
संगत में बिगड सा गया था। अपने पिता के
पास
बहुत पैसा है यह उसे घमंड हो गया था।
दिनभर अपने आवारा दोस्तों के साथ
घूमना फिरना ही उसे अच्छा लगता था। जैसे-
जैसे वह बडा हुआ पैसे खर्च करने की आदत
बढती गयी और वह अपने दोस्तों के कहनेपर
पानी की तरह पैसा बहाने लगा।
मेहनत की कमाई अपना बेटा ऐसे गंवा रहा है
यह देख नारायण को चिंता होने लगी।
उसकी इच्छा थी कि राजू बेटा बडा हो कर
सब कारोबार संभाल ले और वह
अपनी पत्नी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल
जाये। अपने बेटे को समझ आने की आस लगाये
बैठा नारायण बुढापे की तरफ बढ रहा था।
फिर उसने गांव के ही एक विद्वान गृहस्थ थे
सलाह लेने की सोची।
दोनों ने मिलकर सलाह मशवरा किया। खूब
बातें हुई।
दूसरे दिन नारायण ने राजू को बुलाया और
कहा ''बेटा राजू घर से बहार जा कर शाम
होने तक कुछ भी कमाई करके लाओगे तभी रात
का खाना मिलेगा। राजू डर गया और रोने
लग गया। उसे रोता देख मां की ममता आडे आ

नानी की शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक गावं में रामू नाम का एक किसान
रहता था। वह बहुत ही ईमानदार और
भोला-भाला था। यह
सदा ही दूसरों की सहायता करने के लिए
तैयार रहता था।
एक बार की बात है कि शाम के समय वह
दिशा मैदान (शौच) के लिए खेत की ओर
गया। उसके बाद वह ज्योंही घर की ओर
चला उसके पैर में एक अरहर की खूंटी (अरहर
काटने के बाद खेत में बचा हुआ अरहर के डंठल
का थोडा बाहर निकला हुआ जड सहित
भाग) गड़ गई। उसने
सोचा कि यह किसी और के पैर में गड़े इससे
अच्छा है कि इसे उखाड़ दूं। उसने जोर लगाकर
खूंटी को उखाड़ दिया।
खूंटी के नीचे उसे कुछ सोने
की अशरफियां दिखाई दीं। उसने
सोचा कि ये अशर्फियां मेरे लिए हैं तो राम
ने दिखाया, वही घर भी पहुंचाएगा। इसके
बाद घर आकर उसने यह बात अपने
पत्नि को बताई। रामू की पत्नि उससे
भी भोली थी, उसके पेट में यह बात
नहीं पची और उसने जाकर
पड़ोसी को बता दी।
पड़ोसी बड़ा ही घाघ था। रात को जब
सभी लोग सो गए तो उसने अपने
घरवालों को जगाया और कहा– चलो , हम
लोग अशर्फियां खोद लाते हैं।
वे सभी कुदाल आदि लेकर खेत में पहुंच गए।
उन्होंने बताई हुई जगह पर खोदा। सभी के
चेहरे खुशी से खिल गए क्योंकि वहां एक
नहीं पांच-पांच बटुलियां (धातु का ए…

Kathayen Jo Gyan De.

एक बार की बात है की एक बहुत
बड़ा उद्धयोगपति व्यापार करने के लिए
विदेशों में जाता था| उसके पास एक बहुत
बड़ा पानी का जहाज़ था जिसमें वह
अपना माल लादकर विदेश ले
जाया करता था|
एक बार किसी देश की यात्रा के दौरान
ही उसका जहाज़ का इंज़न खराब हो गया|
जहाज़ में कई मैकेनिक थे वे सभी इंज़न
की मररमत में लग गये| बहुत समय बीत
गया लेकिन जहाज़ स्टार्ट नहीं हुआ| अब
सारे मैकेनिक थक कर हार मान चुके थे|
तभी वहाँ से एक बूढ़ा व्यक्ति गुज़रा जो पहले
कभी जवानी में जहाज़ों की रेपरिंग
करता था| व्यापारी ने उससे जहाज़
को ठीक करने की विनती की | बूढ़े
व्यक्ति ने अपने कंधे पे एक
बड़ा सा झोला लटकाया हुआ था जिसमें उसके
औजार थे| अब उसने झोले से एक
हथौड़ा निकाला और जहाज़ के पास आया|
वह घंटों इंज़न को उपर नीचे देखता और
जाँचता रहा लेकिन किया कुछ नहीं| सारे
लोग उसे मूर्ख समझने लगे कि कितनी देर
हो गयी और ये मुर्ख बस इंज़न को देखे
जा रहा है| बहुत देर बाद बूढ़े को कुछ समझ में
आया और उसने इंज़न के एक पुर्ज़े पर हल्के से
हथौड़ा मारा और इंज़न स्टार्ट हो गया|
सारे लोग खुशी खुशी वहाँ से चल दिए|
एक सप्ताह बाद व्यापारी को 10,000
रु…

रेगिस्तान में दो मित्र

दो मित्र रेगिस्तान में यात्रा कर रहे थे।
सफर में किसी मुकाम पर उनका किसी बात
पर वाद-विवाद हो गया। बात इतनी बढ़
गई कि एक मित्र ने दूसरे मित्र को थप्पड़
मार दिया। थप्पड़ खाने वाले मित्र
को इससे बहुत बुरा लगा लेकिन बिना कुछ कहे
उसने रेत में लिखा – "आज मेरे सबसे अच्छे
मित्र ने मुझे थप्पड़ मारा"।
वे चलते रहे और एक नखलिस्तान में आ पहुंचे
जहाँ उनहोंने नहाने का सोचा। जिस
व्यक्ति ने थप्पड़ खाया था वह रेतीले दलदल
में फंस गया और उसमें समाने लगा लेकिन उसके
मित्र ने उसे बचा लिया। जब वह दलदल से
सही-सलामत बाहर आ गया तब उसने एक
पत्थर पर लिखा – "आज मेरे सबसे अच्छे
मित्र ने मेरी जान बचाई"।
उसे थप्पड़ मारने और बाद में बचाने वाले
मित्र ने उससे पूछा – "जब मैंने तुम्हें
मारा तब तुमने रेत पर लिखा और जब मैंने
तुम्हें बचाया तब तुमने पत्थर पर लिखा,
ऐसा क्यों?"
उसके मित्र ने कहा – "जब हमें कोई दुःख दे
तब हमें उसे रेत पर लिख देना चाहिए
ताकि क्षमाभावना की हवाएं आकर उसे
मिटा दें। लेकिन जब कोई हमारा कुछ
भला करे तब हमें उसे पत्थर पर लिख
देना चाहिए ताकि वह हमेशा के लिए
लिखा रह जाए।

Relationship: an emotional bond रिश्ता : एक भावनात्मक जुड़ाव

रिश्ते कितने नाजुक होते हैं कदाचित इस
बात का पता हमें तब चलता है जब कोई
सम्बन्ध टूट जाता है या टूटने लगता है. वैसे
तो आमतौर पर लोगों को यह कहते
सुना जा सकता है कि " मेरा उसके साथ बहुत
गहरा सम्बन्ध है." पर वास्तव में उसके
सम्बन्धों की गहराई का पता तो तब
चलता है जब सम्बन्ध
मिट्टी की भीगी दीवार की भांति दरक
जाते हैं.ठीक उसी प्रकार जैसे
किसी की कमी का एहसास हमें तब होता है
जब वह हमसे बिछड़ जाता है.
यदि थोडा सा विचार किया जाये तो हम
पाएंगे कि सम्बन्ध पेड़ों से
लटकती या दीवार पर चढ़ती उन कोमल
लताओं के समान है जो दीवार से गिरकर
या पेड़ से लटककर पथिक के रास्ते में आकर
उसके पैरों से उलझ जाती है - वैसे यह
कहना गलत होगा कि लताएँ पथिक के पैरों में
उलझ जाती हैं, क्योंकि उलझता तो पथिक है
स्वयं लताओं तक जाकर - और एक जरा से झटके
से टूट जाती है.
सम्बन्धों को भी लताओं की भांति बचाकर
चलना पड़ता है तभी सम्बन्ध लम्बे समय तक
चल पाते हैं.सम्बन्धों को निबाहने के लिए
मनुष्य को बड़ा ही सहनशील होना चाहिए
क्योंकि सम्बन्ध बनने में तो समय लगता है
किन्तु टूटने में पल भर
भी काफी है.हमारी एक छोटी सी चूक
वर्षों के…

Excuses success against बहाने विरूध्द सफलता

1- मुझे उचित शिक्षा लेने का अवसर
नहीं मिला...
उचित शिक्षा का अवसर फोर्ड मोटर्स के
मालिक हेनरी फोर्ड को भी नहीं मिला।
2- बचपन में ही मेरे पिता का देहाँत
हो गया था...
प्रख्यात संगीतकार ए.आर. रहमान के
पिता का भी देहांत बचपन में
ही हो गया था।
3- मैं अत्यंत गरीब घर से हूँ ...
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी गरीब घर
से थे ।
4- बचपन से ही अस्वस्थ था...
आस्कर विजेता अभिनेत्री मरली मेटलिन
भी बचपन से बहरी व अस्वस्थ थी ।
5 - मैंने साइकिल पर घूमकर
आधी ज़िंदगी गुजारी है...
निरमा के करसन भाई पटेल ने भी साइकिल
पर निरमा बेचकर आधी ज़िंदगी गुजारी।
6- एक दुर्घटना मे अपाहिज होने के बाद
मेरी हिम्मत चली गयी...
प्रख्यात नृत्यांगना सुधा चन्द्रन के पैर
नकली है ।
7- मुझे बचपन से मंद बुद्धि कहा जाता है...
थामस अल्वा एडीसन को भी बचपन से
मंदबुद्धि कहा जाता था।
8- मैं इतनी बार हार चूका, अब हिम्मत
नहीं ...
अब्राहम लिंकन 15 बार चुनाव हारने के
बाद राष्ट्रपति बने।
9- मुझे बचपन से परिवार
की जिम्मेदारी उठानी पड़ी ...
लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार
की जिम्मेदारी उठानी पड़ी थी।
10- मेरी लंबाई बहुत कम है...
सचिन तेंदुलकर क…

Life is a flight जिंदगी एक उड़ान है

जिंदगी एक उड़ान है
सुख और दुःख इसमे एक समान है
लगता है देखकर दूसरों को उड़ना आसान है
पर आती है कितनी मुश्किलें हम तो अन्जान है
जिंदगी की इस दौड़ में हर कोई मेहमान है
पुरे कर लिए अपने सपने जिसने , वो ही महान
है
कुछ ऐसे लोग भी है जो जिन्दगी से परेशान है
हार कभी न मानना, ये
तो जिन्दगी का इम्तहान है
जिन्दगी दिखा रही है हर रोज खेल नए , हमें
इसका गुमान है
कभी कुछ खो के , कभी कुछ पा के हम हैरान है
जो हार गया समय से पहले , तो ये
जिन्दगी का अपमान है
मिली है बड़ी मुश्किलों से ये जिन्दगी , ये
ऊपर वाले का अहसान है
गिर कर फिर
सभलना ही जिन्दगी की पहचान है
जो दुसरो के लिए कुछ कर जाए , तो ये
जिन्दगी की शान है
जिंदगी एक लम्बी उड़ान है
सुख और दुःख इसमे एक समान है